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राजनीति और हमारा समाज

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राजनीति और हमारा समाज आज का राजनीतिक समाज 👇 https://www.jagatgururampalji.org  राजनीति में देश प्रेम की भावना की जगह परिवारवाद, जातिवाद और संप्रदाय ने ले ली है। आए दिन जिस तरह से नेताओं के भ्रष्टाचार के किस्से बाहर आ रहे है देश के युवा वर्ग में राजनीति के प्रति उदासीनता बढ़ती जा रही है। युवाओं के लिए आज भारत का हर नागरिक भली-भांति अपना अच्छा बुरा समझता है। युवाओं को संप्रदायवाद तथा राजनीति से परे अपनी सोच का दायरा बढ़ाना होगा। युवाओं को इस मामले में एकदम सोच समझकर आगे बढ़ना होगा। और ऐसी किसी भी भावना में न बहकर सोच समझकर निर्णय लेना होगा। ★ ।। #जीवन के #अगूण #रहस्य।। ★ एक बार एक #मेढक (Frog🐸) होता है , (असल मे मेढक को जिस परिस्थिति में रखा जाए तो वो उसी के अनुरूप (According) अपना #व्यवहार बदल लेता है अथार्त #सर्दी में उसके अनुरूप ओर गर्मियों में उसी के अनुरूप स्वयं को परिवर्तित कर लेता है) जो कि अपने ऊपर बहुत विश्वास करता है उसको लगता है कि वो हमेशा ही स्वयं को विभिन्न परिस्थिति के अनुरूप परिवर्तित कर सकता है। तो एक दिन क्या होता है मेढक को एक कांच के एक पात...

राजनीति और हमारा समाज

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 राजनीति और हमारा समाज https://www.jagatgururampalji.org  आज का राजनीतिक समाज  राजनीति में देश प्रेम की भावना की जगह परिवारवाद, जातिवाद और संप्रदाय ने ले ली है। आए दिन जिस तरह से नेताओं के भ्रष्टाचार के किस्से बाहर आ रहे है देश के युवा वर्ग में राजनीति के प्रति उदासीनता बढ़ती जा रही है। युवाओं के लिए आज भारत का हर नागरिक भली-भांति अपना अच्छा बुरा समझता है। युवाओं को संप्रदायवाद तथा राजनीति से परे अपनी सोच का दायरा बढ़ाना होगा। युवाओं को इस मामले में एकदम सोच समझकर आगे बढ़ना होगा। और ऐसी किसी भी भावना में न बहकर सोच समझकर निर्णय लेना होगा यह संसार समझदा नाहीं, कहन्दा श्याम दोपहरे नूं। गरीबदास यह वक्त जात है, रोवोगे इस पहरे नूं।। कबीर साहिब कहते है ~ कबीर- तूने उस दरगाह का महल नहीं देखा, जहाँ धर्मराय के तिल -२ का लेखा।। 👉और पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब इस संसार मे जीव के उद्धार के लिए सभी युगों में अलग अलग रूपो में आये और अब जगत गुरु #संत #रामपाल जी महाराज के रूप में।। -#कबीर-  #सत् युग में #सत् सुकृत कहं टेरा, #त्रेता नाम #मुनिंदर मेरा #द्व...

राजनीति और हमारा समाज

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 आज का राजनीतिक समाज 👇  राजनीति में देश प्रेम की भावना की जगह परिवारवाद, जातिवाद और संप्रदाय ने ले ली है। आए दिन जिस तरह से नेताओं के भ्रष्टाचार के किस्से बाहर आ रहे है देश के युवा वर्ग में राजनीति के प्रति उदासीनता बढ़ती जा रही है।  युवाओं के लिए आज भारत का हर नागरिक भली-भांति अपना अच्छा बुरा समझता है। युवाओं को संप्रदायवाद तथा राजनीति से परे अपनी सोच का दायरा बढ़ाना होगा। युवाओं को इस मामले में एकदम सोच समझकर आगे बढ़ना होगा। और ऐसी किसी भी भावना में न बहकर सोच समझकर निर्णय लेना होगा। पहले हमरा समाज सामाजिक समाज था लेकिन अब लगने लगा है कि यह राजनीतिक समाज हो गया है वैसे तो राजनीति का सीधा संबंध मनुष्यता से होता है लेकिन राजनीति की वजह से मानवीय संबंध बदल रहे हैं आपसी संबंध के कारणों में अगर जाएं तो अब गहरे संबंध लंबे समय के सामाजिक संबंध नहीं रह गए अब  राजनीतिक समाज के संबंध हो गए हैं पहले जो सामाजिक समाज था उसमें अपनों से बड़ों को काका या बढ़ाया दादा या चाचा जैसे संबंधों से संबोधित करते थे और उनके सामने वैसे ही होते थे जैसे किसी बड़े के साम...