राजनीति और हमारा समाज
आज का राजनीतिक समाज
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राजनीति में देश प्रेम की भावना की जगह परिवारवाद, जातिवाद और संप्रदाय ने ले ली है। आए दिन जिस तरह से नेताओं के भ्रष्टाचार के किस्से बाहर आ रहे है देश के युवा वर्ग में राजनीति के प्रति उदासीनता बढ़ती जा रही है।
युवाओं के लिए
आज भारत का हर नागरिक भली-भांति अपना अच्छा बुरा समझता है। युवाओं को संप्रदायवाद तथा राजनीति से परे अपनी सोच का दायरा बढ़ाना होगा। युवाओं को इस मामले में एकदम सोच समझकर आगे बढ़ना होगा। और ऐसी किसी भी भावना में न बहकर सोच समझकर निर्णय लेना होगा।
पहले हमरा समाज सामाजिक समाज था लेकिन अब लगने लगा है कि यह राजनीतिक समाज हो गया है वैसे तो राजनीति का सीधा संबंध मनुष्यता से होता है लेकिन राजनीति की वजह से मानवीय संबंध बदल रहे हैं आपसी संबंध के कारणों में अगर जाएं तो अब गहरे संबंध लंबे समय के सामाजिक संबंध नहीं रह गए अब राजनीतिक समाज के संबंध हो गए हैं पहले जो सामाजिक समाज था उसमें अपनों से बड़ों को काका या बढ़ाया दादा या चाचा जैसे संबंधों से संबोधित करते थे और उनके सामने वैसे ही होते थे जैसे किसी बड़े के सामने होते हैं लेकिन अब वह स्थिति नहीं है अब तो सारी चीजें और स्थितियों को देखने के पीछे कहीं न कहीं राजनीति कारण होता है
राजनीति तो घुसपैठ करती है अगर किसी हवा पानी कमरे में भी अपने आप को कैद कर ले तो वह राजनीति को नहीं रोक सकते
;वैसे हम कहते हैं कि हम लिखने के लिए स्वतंत्र है लेकिन तब भी एक अंदरूनी सेंसरशिप हमेशा लागू रहती है
समाज में लिखने के बाद के कई कारण होते हैं जिसकी वजह से आदमी कहीं ना कहीं अपने आप को असुरक्षित महसूस करने लगा है ऐसे लगता है कि राजनीति की वजह से लोग जरूरत से ज्यादा संवेदनशील हो गए लेकिन यह संवेदनशीलता मानवीयता के लिए उतनी नहीं जितनी राजनीती को लेकर है
आज के समय में यह समाज इन कुरीतियों की वजह से पीछे हैं
;क्योंकि इन कुरीतियों की वजह से समाज में महिलाओं को सम्मान जनक रूप से नहीं देखा जाता उनके साथ भेदभाव किया जाता है लेकिन इन सब कुरीतियों को जड़ से मिटाने का काम सिर्फ संत रामपाल जी महाराज जी कर सकते हैं
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